इस्लामी गणतंत्र ईरान में आज इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह के स्वर्गवास की 22 वीं बरसी पूरी श्रद्धा के साथ मनाई गई।राजधानी तेहरान के निकट स्थित इमाम ख़ुमैनी के रौज़े पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए जबकि विश्व के विभिन्न देशों से आए सैकड़ों अतिथि भी उपस्थित थे। इस अवसर इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने अपने भाषण में इमाम ख़ुमैनी की विचारधारा को बहुआयामी एवं संपूर्ण संग्रह बताया जो आज भी विश्व के राष्ट्रों के स्तर पर गहरे प्रभाव और परिवर्तनों का स्रोत है। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने आध्यात्म, बुद्धिमत्ता तथा न्याय के संबंध में इमाम ख़ुमैनी के व्यक्तित्व की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए इमाम ख़ुमैनी के व्यक्तित्व के सभी आयामों पर एक साथ ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया तथा इस व्यक्तित्व के किसी एक आयाम तक दृष्टि को सीमित कर देने को इमाम ख़ुमैनी के मार्ग से विचलित हो जाने के समान बताया। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरानी राष्ट्र ने इमाम ख़ुमैनी की इसी विचारधारा के चलते हमेशा मैदान में उपस्थित होकर शत्रुओं की योजनाओं को विफल बनाया है तथा विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में अपनी प्रगति को जारी रखा है। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने इमाम ख़ुमैनी की विचारधारा के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला तथा इमाम खुमैनी एवं ईरानी जनता की दृढ़ता और प्रतिरोध को इस्लामी क्रान्ति की सफलता का मूल रहस्य घोषित किया। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता का कहना था कि इमाम ख़ुमैनी के नेतृत्व मे जो क्रान्ति ईरान में सफल हुई उसने विश्व भर में एसे परिवर्तन उत्पन्न किए जो गहराई की दृष्टि से बड़े महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं और इन्हीं परिवर्तनों के आधार पर समाज को आगे ले जाया जा सकता है। इस्लामी क्रान्ति की सफलता से केवल ईरानी जनता को राजनैतिक स्वाधीनता ही नहीं मिली बल्कि उसके भीतर अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं का बोध और आत्म विश्वास उत्पन्न हुआ। जनता की इच्छाओं को आधार बनाना, वर्चस्ववादी व्यवस्था के विरुद्ध डट जाना तथा स्वाधीनता एवं न्याय प्रेम जो इस्लामी लोकतंत्र व्यवस्था के महत्वपूर्ण सिद्धांत थे आज विश्व में ईरानी राष्ट्र की महानता का प्रतीक बन चुके हैं तथा क्षेत्र और विश्व में इसके प्रभावों को देखकर शत्रु हतप्रभ है। क्षेत्र के राष्ट्रों में उत्पन्न होने वाली जागरूकता की लहर में ईरान की इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था के गहरे प्रभाव के विषय में पश्चिमी संचार माध्यमों की स्वीकारोक्ति इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था के उच्च स्थान की प्रतीक है।वास्तव में क्षेत्र के देशों के परिवर्तन महान इस्लामी जागरूकता का दर्पण है जो बड़े महत्वपूर्ण, प्रभावी एवं इतिहासिक प्रभावों का स्रोत है। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता के अनुसार क्षेत्र की जनक्रांतियों की तीन महत्वपूर्ण समानताएं हैं। एक है इन आंदोलनों की इस्लामी प्रवृत्ति, दूसरे इनका अमरीका एवं ज़ायोनियों के विरुद्ध होना तथा तीसरे इनका जन केन्द्रित होना। यह घटनाएं अचानक अस्तित्व में नहीं आईं बल्कि तीस वर्षों के दौरान धीरे धीरे सामने आई हैं। क्योंकि इन वर्षों के दौरान मुस्लिम राष्ट्रों के मन में इस्लामी जागरूकता की भावना प्रबल एवं विकसित हुई। अब इसके प्रकाशमय परिणामों को क्षेत्र एवं विश्व के परिवर्तनों में देखा जा सकता है। इन परिवर्तनों से पता चलता है कि इमाम ख़ुमैनी की जीवन प्रसारक विचारधारा तथा इस्लामी क्रान्ति राष्ट्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।
4 जून 2011 - 19:30
समाचार कोड: 245402
इस्लामी गणतंत्र ईरान में आज इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह के स्वर्गवास की 22 वीं बरसी पूरी श्रद्धा के साथ मनाई गई। राजधानी तेहरान के निकट स्थित इमाम ख़ुमैनी के रौज़े पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए जबकि विश्व के विभिन्न देशों से आए सैकड़ों अतिथि भी उपस्थित थे। इस अवसर इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने अपने भाषण में इमाम ख़ुमैनी की विचारधारा को बहुआयामी एवं संपूर्ण संग्रह बताया जो आज भी विश्व के राष्ट्रों के स्तर पर गहरे प्रभाव और परिवर्तनों का स्रोत है